शेर कि दहाड़..

गुजरात के “शेर” के सामनेimages

हो गया उनका बुरा हाल

होश उड गए सबके

उलटी पड गई चाल ।

माया का “हाथी”

हो गया बेअसर

हवा निकल गई

“साईकल” पंक्चर ।

टुटे सपने उनके “मुलायम”

फेल हो गया एक्का “आझम”

बुझ गई “लालटेन” हुआ अंधेरा

उजड गया कितनों का बसेरा ।

नमो के दो “आखो” ने

काटे कितने ही “हाथ”

होंगा सबका विकास

लेकर सबका साथ ।

लुटने वालों को

अब अच्छा मजा चखाऐंगे

जरा धिरज रखना

अब अच्छे दिन आऐंगे ।

 

 

 

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