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राजनीती

Posted by on October 12, 2017

राजनीती के मायने
इतने बदल गए है
नेताओं की टिका टिपणी
चढ़ी बनियान तक पहुंच गए है।
क्या मर्यादा,क्या विचार?
दिखता है बस व्यभिचार
खस्ता हो गया है लोकतंत्र
“सत्ता” केवल व्यापार।
सबका अपना मतलब
सबका अपना रंग
सबकुछ जायज है
रोज की नेताओं की जुबानी जंग।
“आय. सी. यु. ” में है व्यवस्था
लोकतंत्र व्हेन्टीलेटर पर है
फिरभी बदलाव की आस लिए
हम मतदान कर रहे है।

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