browser icon
You are using an insecure version of your web browser. Please update your browser!
Using an outdated browser makes your computer unsafe. For a safer, faster, more enjoyable user experience, please update your browser today or try a newer browser.

दस्तक..

Posted by on February 4, 2013

malalaएक नन्हीं सी परी

आशा बनकर आई तो

मानो ऐसा लगा कि

उजडे चमन में खिलखिलाती धूप छाई ।

उस कलिने धिरे धिरे

अपनी पंखुडियाँ खोली

तब एहसास हुआ कि

भगवान ने अपना आर्शिवाद हमे दिया हो..

उस कलिने जब फुल बन ने कि कोशिश कि

तब दुनिया कि नियत बदलने लगी

उसने चारों तरफ देखा,

तो वो भी फुट फुटकर रोने लगी..malala1

उसे मानो ऐसा लगा..

यह दुनिया उसके लिए बनी ही नही है..

जो देखो वो अपनी अपनी बंदिशे लेकर खडा है

किसिने यह भी पल भर भी नही सोचा..

वो भी एक चाह अपने मन में रखती है

जिवन के हर मोड पर जिना चाहती है..

कभी हिरनी कि तरह उछलना चाहती है..

कभी नदी कि धारा बनकर बहना चाहती है..

तो कभी पर्वतों कि विशाल शृखलाऐ बनकर

शान से जिना चाहती है…

वो कभी गिरती थी.. कभी संभलती थी..

कभी चलती थी.. कभी रुकती थी

लेकिन हर बार अपने मन में एक हीmmmm1

सवाल लिए वो आगे बढ़ती गई

“यह दुनिया मेरे लिए है?”

यह सवाल लिए वो जिती रही..

हर युग में वो आती रही..

पर आज तक उसे ना कोई जवाब मिला..

ना ही दुनिया बदली..

हा, बस बदला तो उसका नाम..

पर हर जगह, हर मोड पर. हर दरवाजे पर..

वो दस्तक देती है

कभी ‘मलाला’, तो कभी दामिनी बनकर..

हमे शायद एहसास दिलाती है

वो भी एक इंसान कि तरह जिना चाहती है

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Powered by Kapil