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आतंक पर चढी सियासत..

Posted by on January 23, 2013

नफरत कि आँधी नेt1

बाटाँ था एक माँ को

मंदिर, मश्दि के नाम पर

हमने बाँटा यहा प्यार को ।

खडी हुई दिवारें

बही खुन कि नदियाँ

जख्म् ऐसे गहरे हुएt2

नही मिटी वो दुरिया ।

घर बटें, जमिन बटी

और बट गया एक देश

भुला नही सकते हम

होता है मन को क्लेश ।

आज भी मच रहा है

उनका जगह जगह आतंक

ना जाने कब मिटेंगा

हमारे माथे से यह कलंक ?।t3

धर्म,जात-पात, देश-प्रदेश

सबको हमने बाँटते देखा

स्वार्थ से अंधे होकर

आतंकवाद पर भी

सियासत का रंग देखा ।

किसको समझाए ?

आतंक का ना धर्म होता है, ना होती है जात

चाहे वो मरे, या यह मरे

आखिर मरता है मानव जात ।t4

 

One Response to आतंक पर चढी सियासत..

  1. Rajeshwari.C

    Dear Varsha,
    Bharat ki sarkar tho ise maarti nahin , Mosqutoes ne socha ise hum hi maar dete hai. Well said.

    Rajeshwari.C

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