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Hindi

चुनाओं का दौर

                        हो गया ऐलान आ गए है चुनाव हर कोई खेलेगा अपना अपना दाँव। हमे बनायेंगे वो भगवान मीठी हो जायेंगी उनकी जुबाँ झूठे मुठे वादोंसे चलाएंगे अपनी दुकान। कोई चलेगा “विकास” का दाँव कोई खेलेगा “जाती” का कार्ड सपनों का दौर चलेगा वैसे … Continue reading »

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मैं तिरंगा बोल रहा हूँ …..

                          आझादी के ७० साल बीत गए पर फिर भी मै असमंजस में हूँ … इस स्वतंत्र खुले आकाश मे जब मै लहराता हूँ …. तो मेरे मन में यह ख़याल आता है क्या सच में, मै खुली साँस ले रहे हूँ ? या … Continue reading »

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Dear Bapu…

प्रिय बापूजी, आज हम हर साल की तरह आपको याद कर रहे है। आज आपकी जयंती है। पुरे देश में आज अलग अलग कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। और क्यों न हो ? कम से कम एक दिन ही सही सब आपको याद करते है। आज कोई राजनीति नहीं, कोई गुटबाजी नहीं। वरना … Continue reading »

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देश का “लाल”

दिया था आपने नारा  “जय जवान, जय किसान” जीवित हो उठा था फिरसे मुरझाया हिन्दुस्थान। दुनियाँ ये मानती थी हम तो हो गए दुर्बल पर आपने अपने निश्चयसे हिन्दुस्थान को कर दिया सबल। एक तरफ था युद्ध दूसरी तरफ थी भूख मरी लेकिन आपका अटूट विश्वास पड़ा था दोनों पर भारी। दुनियाँ मान चुकी थी लोहा … Continue reading »

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रावण

बड़े ही उल्हास से करेंगे हम रावण दहन पर सोच कभी रावण जैसा ही है अपना मन , भले ही समा बैठे है हम ज्ञान का भंडार पर छूटा नहीं हमसे भीतर बैठा अहंकार , राह चलते कोई भी रोज ‘सीता ‘ हरण कर जाता है देखकर “निर्भया” से बर्बरता रावण का भी सिर झुक … Continue reading »

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मॉडर्न कौए…

बाजु में रहने वाले पंडितजी के घरसे कौए जोरसे चिल्ला रहे थे हमने पूछा ” ये क्या हो रहा है ?” उन्होंने कहाँ “हम उन्हें ट्रैन कर है। पितृ पक्ष में कौओ की डिमांड बढ़ रही है ग्राहकों की सुविधा के लिए हमने ये सेवा शुरू की है. अलग अलग कौओ के अलग अलग रेट्स रखे … Continue reading »

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बाबाजी का ठुल्लु ..

एक के बाद एक खुल रही है बाबाओ की पोल आस्था के नाम पर दुनियाँ को घुमाया गोल, किसका डेरा सच्चा ? किसका है झूठा हर कोई है यहाँ भगवान बन बैठा , आधुनिक युग में हम बन जाते है ऊलूँ करते है वो राज हमे मिलता है बाबाजी का ठुल्लु 

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रावन राज…

जिधर देखो उधर मची है कैसी लुट ? जात, धर्म के नाम पर लोगो में डाल रहे फुट ।

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अर्थ-हिन व्यवस्था…

क्या हो रहा है यहाँ पर क्यों सबके मन में है खोट? गरिब बेचारा मर रहा है और नेता खा रहे है नोट ।

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एक और घोटाला…

फिर से एक बार खुल गई है पोल देश के गद्दारोंने बनाया कितना बडा ‘होल’ ।

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